Sunday, 13 March 2022

ब्याज दर में बदलाव करते हुए इसे 8.5 से घटाकर 8.1 फीसदी कर दिया


गुवाहटी.होली से पहले सरकार ने कर्मचारियों को एक बड़ा झटका दिया है, जो सीधे देश के लगभग छह करोड़ वेतनभोगियों को निराश करने वाला है. 230 वीं कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की  दो दिवसीय बैठक शुक्रवार से गुवाहाटी में शुरू हुई थी. बैठक में गहन विचार-विमर्श करने के बाद शनिवार को एक बड़ा फैसला लिया गया है.ईपीएफ में जमा राशि पर मिलने वाली ब्याज दर में बदलाव करते हुए इसे 8.5 से घटाकर 8.1 फीसदी कर दिया है.  

 वित्त वर्ष 2021-22 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर घटाकर 8.1 फीसदी करने का प्रस्ताव शनिवार को किया गया. निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की शनिवार को बैठक हुई, जिसमें 2021-22 के लिए ईपीएफ पर ब्याज दर 8.1 फीसदी रखने का फैसला लिया गया.पिछले वित्त वर्ष में यह ब्याज दर 8.5 फीसदी थी. कटौती के बाद ईपीएफ पर 8.1 फीसदी की ब्याज दर बीते चार दशक से भी अधिक समय में सबसे कम ब्याज दर है.इससे पहले ईपीएफ पर ब्याज दर सबसे कम 8 फीसदी 1977-78 में थी.वित्त मंत्रालय के कहने पर पीएफ बोर्ड ने इंट्रेस्ट रेट में कटौती का फैसला लिया है. बोर्ड की बैठक में इंट्रेस्ट रेट में कटौती का जो फैसला लिया गया है उसे अब मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाएगा.

ईपीएफ पर ब्याज दर कम किए जाने की घोषणा के बाद लोगों का गुस्सा फूटने लगा. ट्विटर यूजर्स ने सरकार को खरी खोटी सुनाना शुरू कर दिया. कुछ लोग इसे 5 राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद की पहली कैजुएलिटी करार दे रहे हैं तो कुछ लोगों का कहना है कि अब अगला कदम पेट्रोल-डीजल के दाम में वृद्धि का होगा. ईपीएफ रेट कट पर ट्विटर पर यूजर्स के कुछ रिएक्शन इस तरह हैं.    

शनिवार को गुवाहाटी में ईपीएफओ की बोर्ड बैठक में ट्रेड यूनियनों के काफी विरोध के बाद यह फैसला लिया गया. केंद्रीय न्यासी बोर्ड एक त्रिपक्षीय निकाय है जिसमें सरकार, कर्मचारी और नियोक्ता के प्रतिनिधि शामिल होते हैं और निर्णय ईपीएफओ के लिए बाध्यकारी होता है. इसकी अध्यक्षता श्रम मंत्री करते हैं. हालांकि, वित्त मंत्रालय को अधिसूचित होने से पहले सीबीटी द्वारा घोषित ब्याज दर की समीक्षा करनी होगी. ब्याज आय अधिसूचित होने के बाद ग्राहकों के खाते में जमा हो जाती है.  

मोदी सरकार जब सत्ता में आई थी तब इंट्रेस्ट रेट 8.75 फीसदी थी. वित्त वर्ष 2014-15 में इंट्रेस्ट रेट 8.75 फीसदी, वित्त वर्ष 2015-16 में इंट्रेस्ट रेट 8.80 फीसदी, वित्त वर्ष 2016-17 में इंट्रेस्ट रेट 8.65 फीसदी, वित्त वर्ष 2017-18 में इंट्रेस्ट रेट 8.55 फीसदी, वित्त वर्ष 2018-19 में इंट्रेस्ट रेट 8.65 फीसदी और वित्त वर्ष 2019-20 से इंट्रेस्ट रेट 8.5 फीसदी पर बरकार है.

बता दें कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की जब शुरुआत हुई तो उस समय यानी वित्त वर्ष 1952-53 में पीएफ पर मिलने वाली ब्याज दर को तीन फीसदी तय किया गया. इसके बाद 1954-55 तक इसी दर से ब्याज मिलता रहा. फिर 1955-56 में इसे बदला गया और 1962-63 तक यह 3.50 फीसदी से 3.75 फीसदी के दायरे में रही. 1963-64 में इसे बढ़ाकर चार फीसदी किया गया और 1966-67 तक यह चार से 4.75 फीसदी तक के दायरे में रही. वित्त वर्ष 1967-68 से 1971-72 तक ये पांच फीसदी से 5.80 फीसदी तक रही.इसके बाद  1972-73 में इसे छह फीसदी और 1975-76 में इसे बढ़ाकर सात फीसदी कर दिया गया.

आलोक कुमार


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