Tuesday, 15 March 2022

वंडर प्रोजेक्ट को पूरी तरह सफल क्रियान्वयन कराया जा सके

गया.जिला पदाधिकारी, गया डॉ० त्यागराजन एसएम द्वारा वंडर प्रोजेक्ट ट्रेनिंग तथा श्रवण श्रुति प्रोजेक्ट के संबंध में समीक्षा बैठक समाहरणालय सभाकक्ष में की गई.

वंडर प्रोजेक्ट को सफल क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों को ट्रेनिंग के समीक्षा के दौरान बताया गया कि विभिन्न विभागों में 276 लोगों को ट्रेनिंग दिया गया है, जिनमें सीएससी बोधगया के 6 डॉक्टर, 32 एएनएम, 175 आशा, 8 आशा फैसिलिटेटर, 10 डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रभावती अस्पताल में 1 डॉक्टर, 4 जीएनएम, मगध मेडिकल अस्पताल में 1 डॉक्टर तथा जीविका विभाग द्वारा बोधगया ब्लॉक प्रोग्राम यूनिट के 17 सी एन आर पी, 4 एच एन एस एम आर पी, 12 सी सी, 2 एमआईएस ऑपरेटर, 1 सीएलएफ मैनेजर तथा 3 ऐ सी शामिल है। जिला पदाधिकारी ने जीविका के समूह मगध मेडिकल तथा अन्य स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यालयों के कर्मियों को पर्याप्त ट्रेनिंग करवाने का निर्देश दिए ताकि वंडर प्रोजेक्ट को पूरी तरह सफल क्रियान्वयन कराया जा सके.

जिला पदाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों तथा चिकित्सकों को निर्देश दिया कि इस माह के अंतिम तिथि तक सभी संबंधित व्यक्तियों को प्रॉपर ट्रेनिंग करवाना सुनिश्चित करें ताकि अगले महीने से कैंप का आयोजन कराया जा सके. उन्होंने कहा कि वंडर ऐप के सफल क्रियान्वयन हेतु विभिन्न मेजर इक्विपमेंट्स के लिए केंद्र सरकार के एससीए योजना अंतर्गत उपकरण क्रय के लिए प्रस्ताव उपलब्ध कराएं. उन्होंने कहा कि मगध मेडिकल, जयप्रकाश नारायण अस्पताल तथा प्रभावती अस्पताल के डायग्नोलॉजिस्ट चिकित्सकों को प्राथमिकता देकर भौतिक रूप से वर्कशॉप आयोजित करते हुए ट्रेनिंग करवाएं ताकि भविष्य में किसी भी गंभीर अवस्था वाले मरीजों को प्रॉपर तरीके से कंट्रोल किया जा सके. उन्होंने बताया कि वंडर ऐप रेफरल मामलों में काफी मददगार साबित होगा.उन्होंने कहा कि यदि अगर कोई गर्भवती महिला अस्पताल में है लेकिन उसकी स्थिति काफी दयनीय है, तत्पश्चात उसे किसी बड़े अस्पताल में रेफर करने की आवश्यकता है तो वंडर मोबाइल ऐप में महिला की बीमारी का जिक्र करते हुए रेफर का विकल्प डालें. यह अलर्ट संबंधित बड़े अस्पताल के चिकित्सकों तथा अन्य पदाधिकारियों के मोबाइल पर तुरंत पहुंच जाएगा, जिससे उनके इलाज बिना समय गवाएं और अधिक प्रभावी रूप से किया जा सकेगा. उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि हर स्तर पर बेहतर तरीके से ट्रेनिंग कर ले ताकि आने वाले दिनों में ऐसे मामलों पर अपना बेहतरीन परफॉर्मेंस दे सके.


श्रवण श्रुति प्रोजेक्ट के संबंध में
बताया गया कि जिला स्तरीय विभिन्न पदाधिकारियों के साथ कोआर्डिनेशन बैठक का काफी अच्छा परिणाम सामने आया है. खास करके विभिन्न स्टेकहोल्डर, स्वास्थ्य, शिक्षा, आईसीडीएस तथा सामाजिक सुरक्षा कार्यालय द्वारा काफी सहयोग किया जा रहा हैं.उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को स्क्रीनिंग के लिए विभिन्न स्तरों पर उन्हें मोबिलाइज किया जा रहा है.हर स्तर पर माइक्रो प्लान तैयार करते हुए उन्हें लगातार मॉनिटरिंग भी किया जा रहा है. श्रवण श्रुति प्रोजेक्ट के तहत स्क्रीनिंग किए हुए बच्चों को बेहतर इलाज के लिए बेरा टेस्ट की व्यवस्था कराया जा रहा है.

बैठक में बताया गया कि 2 मार्च से लेकर 12 मार्च के बीच 3323 बच्चों को स्क्रीनिंग किया जा चुका है, जिनमें 23 बच्चों को के लिए रेफर किया गया है तथा उनमें 20 बच्चों का बेरा टेस्ट पूर्ण करते हुए 5 बच्चे बेरा टेस्ट पॉजिटिव पाए गए हैं.जिला पदाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को बताया कि नवजात बच्चों को भी श्रवण श्रुति प्रोजेक्ट के तहत शत प्रतिशत स्क्रीनिंग कराने के लिए कार्य योजना तैयार करें.उन्होंने कहा कि नवजात बच्चों को कौन से उपकरण से जांच किया जाएगा इसके लिए भी विस्तार से गाइडलाइन को पढ़ते हुए उसी अनुरूप तैयारी करें.

उन्होंने कहा कि वर्तमान में बच्चों को किए जा रहे स्क्रीनिंग के उपरांत उन बच्चों को और बेहतर इलाज के लिए संबंधित चिकित्सक सप्ताह में एक दिन द्वारा उन बच्चों को जांच कर वेरीफाई करते हुए उन्हें बेरा टेस्ट कराएं. बच्चों को और बेहतर इलाज के लिए पटना एम्स से समन्वय स्थापित करते हुए उन्हें एंबुलेंस के माध्यम से रेफर करें तथा उनके परिजनों को लगातार फीडबैक दिया करें. इसके उपरांत उन्होंने श्रवण श्रुति प्रोजेक्ट को और अच्छी तरह धरातल पर लाने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर विचार विमर्श किया.

    बैठक में सहायक समाहर्ता, अधीक्षक मगध मेडिकल अस्पताल, सिविल सर्जन गया, हेड ऑफ डिपार्टमेंट डायग्नोलॉजिस्ट मगध मेडिकल, मगध मेडिकल के वरीय चिकित्सकगण, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी बोधगया, प्रखंड विकास पदाधिकारी बोधगया, डीपीओ आईसीडीएस, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी बोधगया, डीपीएम स्वास्थ्य सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं चिकित्सक उपस्थित थे.

जयप्रदा ने बहुत ही अनुभवी स्पीच थेरेपिस्ट अलका हुदलीकर से सीखा कि माता-पिता कैसे ऐसे बच्चों को बोलना सिखाएं. बेरा टेस्ट यदि समय रहते करवा लिया जाए तो माँ-बाप को बच्चे की परेशानी का पता चल जाएगा और इसके बाद छोटी उम्र से ही बच्चों को हियरिंग ऐड लगाए जा सकते हैं. इसकी मदद से बच्चे सुन पाएंगे और फिर बोल भी पाएंगे.

यह स्पीच थेरेपी सीखते-सीखते जयप्रदा ने प्रसून को घर पर ही बोलना सिखाना शुरू किया और 5 साल की उम्र तक उनका बेटा बोलने लगा. प्रसून के बारे में उस समय एक स्थानीय अखबार में खबर छपी और फिर उस ख़बर को पढ़कर आस-पास के इलाकों से लोग उनके पास आने लगे.  बच्चों को क्यों बोरा टेस्ट करवाना चाहिए 

आलोक कुमार

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