* संवैधानिक मूल्यों की धज्जियां उड़ाने वाले विधानसभा अध्यक्ष को अपने विशेषाधिकार की चिंता ज्यादा हैः माले
* बौखलाहट दिखाने की बजाय राज्य में बढ़ते अपराध का जवाब दें मुख्यमंत्री
पटना.विगत 14 मार्च को विधानसभा के अंदर मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के बीच हुई बहस पर टिप्पणी करते हुए माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि संवैधानिक मूल्यों-परम्पराओं और लोकतंत्र की हत्या करने वाले विधानसभा अध्यक्ष को अब अपने विशेषाधिकार की चिंता सता रही है. वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष के ही कार्यकाल में विधानसभा को कलंकित किया गया और विधायकों की पिटाई कराके
विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा के पूरी तरह भजपाकरण की छूट दे रखी है. स्मृति स्तम्भ से उर्दू में लिखे बिहार शब्द को हटाने से लेकर कई ऐसे मामले हैं जिसमें खुलकर भाजपाकरण को बढ़ावा दे रहे हैं.
मामला केवल लखीसराय का नहीं है, बल्कि आज पूरे बिहार में अपराध चरम पर है. दिनदहाड़े मॉब लिंचिंग हो रही है. कहने की जरूरत नहीं कि भाजपा की नफरत की राजनीति के कारण ही ऐसी घटनाओं को सह मिल रहा है.
आगे कहा कि मुख्यमंत्री को बौखलाहट में आने की बजाय इस बात का जवाब देना चाहिए कि अपराध के प्रति उनका जीरो टॉलरेंस का दावा कहाँ गया? उन्हें राज्य में अपराध की बढ़ रही घटनाओं पर जवाब और ठोस कार्रवाई करनी चाहिए.
आलोक कुमार
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