प्रतिष्ठित गैर सरकारी संस्था प्रगति ग्रामीण विकास समिति
बिहार के अंदर पूअररेस्ट एरिया सिविल सोसायटी पैक्स के द्वारा विभिन्न मुद्दों पर कार्य किया जा रहा है। विशेष तौर पर महात्मा गांधी नरेगा, वन अधिकार, भूमि अधिकार दक्षता विकास,शिक्षा,स्वास्थ्य और पोषण आधार बनाया गया है। पैक्स ने विभिन्न गैर सरकारी संस्थाओं को गतिशील बनाने के लिए सहायता प्रदान किया है। राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली प्रतिष्ठित गैर सरकारी संस्था प्रगति ग्रामीण विकास समिति को आठ जिलों में भूमि अधिकार और स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने के लिए सहायता प्रदान किया है। फिलवक्त प्रगति गा्रमीण विकास समिति के द्वारा गया,भोजपुर,जहानाबाद,नालंदा,दरभंगा,कटिहार,अररिया और बांका जिले में कार्य किया जा रहा है। गया के अनिल पासवान, भोजपुर के सिंधु सिन्हा,जहानाबाद के नागेन्द्र कुमार,नालंदा के चन्द्रशेखर, दरभंग के वशिष्ट कुमार सिंह,कटिहार के संजय कुमार प्रसाद,अरिया के विजय गोरैया और बांका के वीणा हेम्ब्रम जिला समन्वयक हैं। इसमें कुल 37 कार्यकर्ता शामिल हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा
योजना
गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर करने वाले पात्र हैं।
पड़ोसी राज्य झारखंड में असंगठित कामगारों को शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। अभी वहां गरीबी रेखा,मनरेगाकर्मी,रिक्शा और ठेला चालक को शामिल कर लिया गया है।
बीपीएल वालों को सालभर के बाद ही स्मार्ट कार्ड और स्मार्ट कार्ड में लाभान्वित को जोड़ने एवं हटाने का कार्य किया जाता है। घर के मुखिया को नहीं हटाया जा सकता है। मरने के बाद ही संभव है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 30 रू0लेकर स्मार्ट कार्ड उपलब्ध कराया जाता है।
परिवार के मुखिया और उसके चार सदस्यों को स्वास्थ्य बीमा किया जाता है।
मुखिया,पत्नी, दो बच्चे,एक अन्य।
चिन्हित अस्पतालों से 5 लोगों का इलाज भर्ती करके किया जाता है। खर्च सिर्फ 30 हजार रू0तक का ही है।
प्रत्येक साल स्मार्ट कार्ड का नवीनीकरण करवाना है। किसी राज्य में आंगनबाड़ी केन्द्र में तो किसी जगह प्रखंड स्तर पर किया जाता है।
इसमें कई तरह की परेशानी है। इससे आप लोग अवगत होंगे। इस पर चर्चा करें।
स्वास्थ्य
जन्म लेने के बाद से ही बीसीजी का टीका बांह में दिया जाता है।
बीसीजी से जानलेवा यक्ष्मा बीमारी से बचाव किया जाता है।
इसके बाद डीपीटी सूई दी जाती है।
डीपीटी की सूई कमर में एक साथ तीन बीमारी गल्लाघोटू,काली खांसी और धनुषटंकार से रक्षा करवाने के लिए दी जाती है। इसे त्रिगुणकारी, ट्रीपल एट्रीजन भी कहते हैं।
इसके साथ पोलियों की खुराक दी जाती है।
पोलियों की खुराक मुंह में दी जाती है।
डीपीटी के अंतिम डॉज के एक साल के बाद बुस्टर डॉज दिया जाता है। इसके बाद ढाई साल के बाद द्वितीय बुस्टर डॉज दिया जाता है।
जब बच्चा 6 माह का हो जाता है। तो विटामिन‘ए’ की एक चम्मच खुराक दी जाती है। जो 6 माह के अंतराल पर दिया जाता रहता है।
जब बच्चा 9 माह का हो जाता है। तो खसरा रोग से बचाव करने के लिए मिजल्स का टीका दिया जाता है।
इसके अलावे जॉन्डिस से बचाव करने का भी टीका दिया जाता है। जो किसी स्वयंसेवी संस्थाओं के द्वारा कम कीमत लेकर बच्चों को देते हैं।
गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण करने के बाद टेटनस का प्रथम डॉज दिया जाता है। इसके बाद एक-एक माह पर तीन बार टेटनस का डॉस दिया जाता है।
भोजपुर जिले के सहार प्रखंड में प्रगति ग्रामीण विकास समिति के कार्यक्षेत्र में बैठक करके समस्याओं का पड़ताल किया गया। स्थिति बहुत ही खराब है। 150 महादलित के पास राष्ट्रीय जीवन बीमा का स्मार्ट कार्ड है। इसमें सिर्फ 3 ही महादलित उपयोग किये। बाकी बॉक्श में जतन से स्मार्ट कार्ड रखे रहें। इससे साफ जाहिर होता है कि आज भी इस कार्ड के उपयोग करने के बारे में ठीक तरह से जानकारी नहीं दी गयी है।
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