पटना।
गैर सरकारी संस्था
ईजाद के सहयोग
से भारतीय मुस्लिम
महिला आंदोलन के
तत्वावधान में सच्चर
कमिटी रपट पर
परिचर्चा आयोजित की गयी।
परिचर्चा के दौरान
उभर कर सामने
आया कि केन्द्रीय
और राज्य सरकार
के द्वारा आयोग
तो बना दिया
जाता है। आयोग
के अध्यक्ष के
द्वारा अनुशंसा भी कर
दी जाती है।
मगर सरकार का
मन करता है
तो उसे लागू
करें अथवा अनुशंसा
को लटका कर
रख दें।
अभी
यूपीए की केन्द्रीय
सरकार ने पिछले
साढ़े चार बरस
में वक्फ बिल
में आंशिक संशोधन
के अलावा मुसलमानों
के हित में
कोई ठोस संस्थागत
कारवाई नहीं की
है। जबकि ऐसे
कम से कम
20 काम वर्षों से टलते
चले आ रहे
है। तथा उन
राज्यों में जहां
यूपीए के घटक
दलों की सरकारे
हैं वहां भी
मिश्रा कमीशन व सच्चर
कमिटी की सिफारिशों
को लागू नहीं
किया गया है।
वहां वक्फ जायदादों
पर से सरकारी
अतिक्रमण भी नहीं
हटाए गए है।
अगले 2-3 महीनों में भी
मुसलमान यूपीए तथा उसके
घटक दलों की
सरकारों की कारकर्दगी
या निष्क्रियता पर
कभी नजर रखेंगे।
उत्तर
प्रदेश में पिछले
डेढ़ बरस में
समाजवादी सरकार ने वोट
के लिए मुसलमानों
के किए गए
अपने चुनावी वायदों
में से एक
भी पूरा नहीं
किया। उसने न
मुसलमानों को आरक्षण
दिया और न
ही सच्चर कमिटी
की सिफारिशों का
कार्यान्वयन किया। बल्कि मुजफ्फरपुर
में मुसलमानों पर
हुई बरबरता को
रोकने में समाजवादी
सरकार नाकाम रही।
अब वहां के
एक लाख विस्थापित
व्यक्तियों से से
कुछ ही को
सरकारी सहायता की घोषणा
की गई है
वह भी इस
शर्त पर कि
यह लोग अपने
घर कभी वापस
नहीं जा सकेंगे।
उधर
29 जून, 2013 को अहमदाबाद
में नरेन्द्र मोदी
जी की सभा
में किए गए
एक पावरप्वाएंट प्रेजेटेशन
के जरिए साफ
तौर पर बता
दिया गया था
कि मुसलमान बीजेपी
से किन वजहों
से बहुत अधिक
नाराज हैं। यह
आजादी के काल
से ही चला
आ रहा है।
परिचर्चा का संचालन
कामेश्वर जी ने
किया। इस अवसर
पर फिरोज मंसूरी,डा.नूर
हसन,अख्तरी बेगमआदि
ने विचार व्यक्त
किये। इस अवसर
राजा रिंकु, आलोक
कुमार आदि लोग
उपस्थित थे।
आलोक
कुमार