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ऐसी ही एक नर्स थी. फ्लोरेंस नाइटिंगेल। उनके बारे में कहा जाता हैं, कि वह रात के समय अपने हाथों में लालटेन लेकर अस्पताल का चक्कर लगाया करती थीं। उन दिनों बिजली के उपकरण नहीं थे, फ्लोरेंस को अपने मरीजों की इतनी फिक्र हुआ करती थी कि दिनभर उनकी देखभाल करने के बावजूद रात को भी वह अस्पताल में घुमकर यह देखती थी कि कहीं किसी को उनकी जरूरत तो नहीं है।
फ्लोरेंस का जन्म 12 मई
सन्
1820 को
हुआ
था।
फ्लोरेंस
की
याद
में
उनके
जन्मदिन
पर
हर
साल
12 मई
को
वर्ल्ड
नर्सिंग
डे
के
रूप
में
मनाया
जाता
है।
जिंदगीभर
बीमार
और
रोगियों
की
सेवा
करने
वाली
फ्लोरेंस
का
अपना
बचपन
बीमारी
और
शारीरिक
कमजोरी
की
चपेट
में
रहा।
फ्लोरेंस के हाथ बहुत कमजोर थे। इसलिए वह ग्यारह साल की उम्र तक लिखना ही नहीं सीख सकी। बाद में फ्लोरेंस ने लैटिन, ग्रीक, गणित की औपचारिक शिक्षा ली। गणित फ्लोरेंस का प्रिय विषय हुआ करता था।
सत्रह साल की उम्र में जब फ्लोरेंस ने अपनी माँ से कहा कि वो आगे गणित पढ़ना चाहती है तब उनकी माँ ने यह कहकर उनका विरोध किया कि गणित औरतों के पढ़ने का विषय नहीं होता है। बहुत दिनों तक परिवारजनों को मनाने के बाद आखिरकार फ्लोरेंस को गणित पढ़ने की इजाजत मिल ही गई।
बाईस साल की उम्र में फ्लोरेंस ने नर्सिंग को अपना कैरिअर बनाने का फैसला किया। उन दिनों अच्छे घर की लड़कियाँ नर्स बनने के बारे में सोचती भी नहीं थी। उस पर से फ्लोरेंस एक सम्पन्न परिवार की लड़की थी। उनका यह फैसला उनके परिवार वालों को पसंद नहीं आया।
सन् 1854 में
ब्रिटेन, फ्रांस और तुर्की ने रूस के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। युद्ध में घायलों के उपचार के लिए कोई सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थी। वहाँ के अस्पतालों में गंदगी पसरी हुई थी। वहाँ की स्थिति इतनी विकट थी कि घाव पर बाँधने के लिए पट्टीयाँ भी उपलब्ध नहीं हो पा रही थी।
शपथ ग्रहण समारोहः महावीर वात्सल्य अस्पताल में
संचालित है ए0 एन0
एम0 प्रशिक्षण केन्द्र। आधुनिक नर्सिंग की जननी फ्लोरेंस नाइटिंगेल के 196 वें जन्म दिवस के अवसर पर महावीर वात्सल्य अस्पताल में शपथ ग्रहण समारोह
रखा गया है। 12 मई को 12
बजे दिन में कॉन्फ्रेंस
हॉल में शपथ दिलाया जाएगा।
आलोक कुमार
मखदुमपुर बगीचा,दीघा घाट,पटना।
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