Thursday, 1 September 2016

जानकी महतो नामक पहलवान को दूध नहीं मिलने से खफा


पटना। बिहार विद्यापीठ में बाढ़ पीड़ित रहते हैं। न्यू बिन्द टोली,कुर्जी में रहने वाले बाढ़ पीड़ितों को आश्रय दिया गया है। यहां पर उषा काल में बच्चों को दूध पीने को दिया जाता है। 90 साल के पहलवान जानकी महतो की ख्वाहिश है कि चूड़ा को दूध में भिंगोकर खाये। बच्चों को दूध वितरण करने वाले पहलवान की इच्छा पूर्ण नहीं कर रहे हैं। इसको लेकर पहलवान खफा हैं।

मोटा अनाज और 3 किलोग्राम दूध पीने वाले पहलवान जानकी महतो कहते हैं कि 6 आना पर मजदूरी करते थे। इसके साथ पहलवानी भी किया करते थे। 40 रू0 में एक बीद्या जमीन लेकर खेती करते थे। इतना करने के बाद लालझरी देवी से विवाह हुआ। दोनों दम्पति के सहयोग से 10 बच्चे हुए। दुर्भाग्य से केवल 2 बच्चे ही बच गये हैं। उनका कहना है कि एक समय में 500 ग्राम मोटा अनाज और 3 किलोग्राम दूध पीते थे। वह आहार नहीं मिल पा रहा है जिसके कारण कमजोर हो गये हैं।

पहलवान जानकी महतो कहते हैं कि उम्र के ढलान पर जाने के ठेंउना में दर्द हैं। आंख बनाने जम्मू-कश्मीर चले गये थे। एक आंख की रोशनी ठीक हो गयी। इसके बाद नेपाल गये। फिर कंकड़बाग में जाकर इलाज कराये। अभी दोनों आंखों  की रोशनी समाप्त हो गयी है। चिकित्सक कहते हैं कि नस सूख जाने के कारण रोशनी नहीं सकती है। कहते हैं कि दीघा स्थित अखारा में कुश्ती लड़ने जाते थे। इसके अलावे गाभतल,खासपुर आदि जगहों में पहलवानी दिखाते थे। बांसकोठी के उद्यड़न राय नामक पहलवान को पटकनी देने पर काफी शोहरत मिली। काफी पैसा भी मिला।

आलोक कुमार

मखदुमपुर बगीचा,दीघा घाट,पटना।

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